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à¤à¤²à¤°à¥à¤œà¥€: कारण और दूर करने के कारगर उपाय
à¤à¤²à¤°à¥à¤œà¥€ बेहद कॉमन बीमारी है। किसी को खाने की चीज से, किसी को किसी खास महक से तो किसी...
à¤à¤²à¤°à¥à¤œà¥€ बेहद कॉमन बीमारी है। किसी को खाने की चीज से, किसी को किसी खास महक से तो किसी को डॉग या कैट से à¤à¤²à¤°à¥à¤œà¥€ हो सकती है। à¤à¤²à¤°à¥à¤œà¥€ की कà¥à¤› और à¤à¥€ वजहें हैं। à¤à¤•à¥à¤¸à¤ªà¤°à¥à¤Ÿà¥à¤¸ से बात करके à¤à¤²à¤°à¥à¤œà¥€ से बचने और इससे निपटने के तरीके बता रही हैं पूजा महरोतà¥à¤°à¤¾:
मà¥à¤•à¥à¤¤à¤¿ जब à¤à¥€ दूध या दूध से बना कà¥à¤› खा लेती हैं, उनके शरीर में खà¥à¤œà¤²à¥€ होने लग जाती है। रोशन जब कà¤à¥€ तरबूज खाते हैं तो पूरे शरीर में लाल चकतà¥à¤¤à¥‡ निकल आते हैं या उलटियां होने लग जाती हैं। अमित को यूं तो कोई हेलà¥à¤¥ इशà¥à¤¯à¥‚ नहीं है, लेकिन जब à¤à¥€ घर में साफ-सफाई होती है और धूल नाक में चली जाती है, तो उनकी सांसें तेज-तेज चलने लगती हैं और नाक और आंखों से पानी आने लगता है। नियति को हलà¥à¤•े धà¥à¤à¤‚ में à¤à¥€ सांस लेने में दिकà¥à¤•त होती है और खांसी होने लगती है। ये à¤à¤²à¤°à¥à¤œà¥€ के लकà¥à¤·à¤£ हैं यानी ये लोग किसी तरह की à¤à¤²à¤°à¥à¤œà¥€ से पीड़ित हैं।
कà¥à¤¯à¤¾ होती है à¤à¤²à¤°à¥à¤œà¥€
जब हमारा शरीर किसी चीज को लेकर ओवर-रिà¤à¤•à¥à¤Ÿ करता है तो उसे à¤à¤²à¤°à¥à¤œà¥€ कहते हैं। à¤à¤²à¤°à¥à¤œà¥€ किसी खाने की चीज, पालतू जानवर, मौसम में बदलाव, कोई फूल-फल-सबà¥à¤œà¥€ के सेवन, खà¥à¤¶à¤¬à¥‚, धूल, धà¥à¤†à¤‚, दवा यानी किसी à¤à¥€ चीज से हो सकती है। इस सà¥à¤¥à¤¿à¤¤à¤¿ में हमारा इमà¥à¤¯à¥‚न सिसà¥à¤Ÿà¤® कà¥à¤› खास चीजों को सà¥à¤µà¥€à¤•ार नहीं कर पाता और नतीजा à¤à¤¸à¥‡ रिà¤à¤•à¥à¤¶à¤¨ के रूप में दिखता है। इस सà¥à¤¥à¤¿à¤¤à¤¿ में शरीर पर लाल-लाल चकतà¥à¤¤à¥‡ निकलना, नाक और आंखों से पानी बहना, जी मितलाना, उलटी होना या फिर सांस तेज-तेज चलने से लेकर बà¥à¤–ार तक हो सकता है। जà¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾à¤¤à¤° à¤à¤²à¤°à¥à¤œà¥€ खतरनाक नहीं होतीं, लेकिन कà¤à¥€-कà¤à¤¾à¤° समसà¥à¤¯à¤¾ गंà¤à¥€à¤° à¤à¥€ हो सकती है।
à¤à¤²à¤°à¥à¤œà¥€ के कारण
खाने की चीजों से: कà¥à¤› लोगों को खाने की चीजों जैसे कि मूंगफली, दूध, अंडा आदि खाने से à¤à¤²à¤°à¥à¤œà¥€ हो सकती है। जिस चीज से à¤à¤²à¤°à¥à¤œà¥€ है, उसे खाने के बाद जी मिचलाना, शरीर में खà¥à¤œà¤²à¥€ होना या पूरे शरीर पर दाने और चकतà¥à¤¤à¥‡ निकलने जैसी समसà¥à¤¯à¤¾ हो सकती है। आमतौर पर कà¥à¤› खाने के बाद 10 मिनट से लेकर आधे घंटे के अंदर à¤à¤²à¤°à¥à¤œà¥€ के लकà¥à¤·à¤£ उà¤à¤°à¤¨à¥‡ लगते हैं।
धूल: धूल के कणों में माइकà¥à¤°à¥‹à¤¬à¥à¤¸ होते हैं जो हमारे आसपास मौजूद रहते हैं। माइकà¥à¤°à¥‹à¤¬à¥à¤¸ जà¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾ हà¥à¤¯à¥‚मिडिटी में पनपते हैं। इनसे होनेवाली à¤à¤²à¤°à¥à¤œà¥€ में आमतौर पर छींकें, आंख और नाक से पानी बहना जैसी दिकà¥à¤•त होती है।
कीट और मचà¥à¤›à¤°: à¤à¤¸à¥‡ लोगों को किसी कीड़े के काटने पर सà¥à¤•िन à¤à¤•दम लाल होकर फूल जाती है। कà¤à¥€-कà¤à¤¾à¤° उलटी, चकà¥à¤•र आना और बà¥à¤–ार à¤à¥€ हो सकता है।
रबड़: रबड़ से बनी किसी à¤à¥€ चीज (गलवà¥à¤¸, कॉनà¥à¤¡à¤®, मेडिकल इकà¥à¤µà¤¿à¤®à¥‡à¤‚ट आदि) के इसà¥à¤¤à¥‡à¤®à¤¾à¤² से जलन, नाक बहना, छींकना, सांस की घबराहट और खà¥à¤œà¤²à¥€ की समसà¥à¤¯à¤¾à¤à¤‚ हो सकती हैं।
खà¥à¤¶à¤¬à¥‚: खà¥à¤¶à¤¬à¥‚ à¤à¥€ कई लोगों के लिठà¤à¤²à¤°à¥à¤œà¥€ की वजह हो सकती है। परफà¥à¤¯à¥‚म, खà¥à¤¶à¤¬à¥‚ वाली मोमबतà¥à¤¤à¤¿à¤¯à¤¾à¤‚, कई तरह के बà¥à¤¯à¥‚टी पà¥à¤°à¥‰à¤¡à¤•à¥à¤Ÿ आदि की खà¥à¤¶à¤¬à¥‚ से सिरदरà¥à¤¦, जी मिचलाने आदि की समसà¥à¤¯à¤¾ हो सकती है।
पालतू जानवर: पालतू जानवर à¤à¥€ कई लोगों की à¤à¤²à¤°à¥à¤œà¥€ का कारण होते हैं। जानवरों के बाल, उनके मà¥à¤‚ह से निकलने वाली लार, रूसी आदि से कई लोगों को गंà¤à¥€à¤° परेशानियां होती हैं।
घास: कई बार घास, पेड़ और फूल à¤à¥€ à¤à¤²à¤°à¥à¤œà¥€ का कारण होते हैं। इनके संपरà¥à¤• में आने पर खà¥à¤œà¤²à¥€, आंखों में जलन, लगातार छींक और खà¥à¤œà¤²à¥€ आदि की समसà¥à¤¯à¤¾ हो सकती है।
मौसम: कई लोगों को किसी खास मौसम से à¤à¥€ à¤à¤²à¤°à¥à¤œà¥€ होती है। जब मौसम बदलने लगता है तो इन लोगों को गले की खराश, बà¥à¤–ार, नाक बहना, आंखों में जलन जैसी समसà¥à¤¯à¤¾ होती है। à¤à¤¸à¥‡ में कोशिश करें कि जà¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾-से-जà¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾ घर के अंदर रहें। तापमान में तेज बदलाव से बचें। यानी à¤à¤•दम ठंडे से गरà¥à¤® में या गरà¥à¤® से ठंडे में न जाà¤à¤‚।
पॉलेन: पॉलेन यानी फूलों के पराग कणों से à¤à¥€ लोगों को à¤à¤²à¤°à¥à¤œà¥€ होती है। पेड़-पौधों और घास-फूस के संपरà¥à¤• में आने पर ये बारीक कण नाक और गले में चले जाते हैं और दिकà¥à¤•त की वजह बनते हैं। जिस मौसम में पॉलेन आते हैं, उस दौरान घर से बाहर कम निकलें। घर की खिड़कियां बंद करके रखें। à¤à¤¸à¥€ या पंखे में रहें और कूलर का इसà¥à¤¤à¥‡à¤®à¤¾à¤² न करें। घर में à¤à¤¯à¤° पà¥à¤¯à¥‚रिफायर लगवाà¤à¤‚। घर से बाहर निकलना ही हो तो आंखों पर चशà¥à¤®à¤¾ और नाक पर मासà¥à¤• लगाकर बाहर निकलें।
मेटल: कई लोगों को मेटल जैसे कि गोलà¥à¤¡ या सिलà¥à¤µà¤° ऑकà¥à¤¸à¤¿à¤¡à¤¾à¤‡à¤œà¥à¤¡ जूलरी से à¤à¤²à¤°à¥à¤œà¥€ होती है तो कà¥à¤› को लेदर या सिंथेटिक कपड़ों से। à¤à¤¸à¤¾ होने पर इन चीजों के कॉनà¥à¤Ÿà¥ˆà¤•à¥à¤Ÿ में आने के बाद खà¥à¤œà¤²à¥€ आदि हो सकती है। à¤à¤¸à¥‡ लोग इन चीजों के इसà¥à¤¤à¥‡à¤®à¤¾à¤² से बचें। अगर कà¤à¥€ पहनना ही पड़े और खà¥à¤œà¤²à¥€ होने लगे तो उस जगह पर सà¥à¤Ÿà¥‡à¤°à¥‰à¤¯à¤¡ बेसà¥à¤¡ कà¥à¤°à¥€à¤® लगाà¤à¤‚।
दवा: किसी खास दवा से à¤à¤²à¤°à¥à¤œà¥€ à¤à¥€ काफी लोगों को होती है। अगर उस दवा को लेना जारी रखा जाठतो परेशानी बढ़ सकती है।
à¤à¤²à¤°à¥à¤œà¥€ किसको जà¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾
à¤à¤•à¥à¤¸à¤ªà¤°à¥à¤Ÿ मानते हैं कि गांवों में रहनेवालों के मà¥à¤•ाबले शहरों में रहने वालों में à¤à¤²à¤°à¥à¤œà¥€ की समसà¥à¤¯à¤¾ जà¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾ पाई जाती है। जिन बचà¥à¤šà¥‹à¤‚ को जà¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾ साफ-सफाई के साथ पाला जाता है, उनमें à¤à¥€ यह समसà¥à¤¯à¤¾ जà¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾ पाई जाती है कà¥à¤¯à¥‹à¤‚कि उनके शरीर का इमà¥à¤¯à¥‚न सिसà¥à¤Ÿà¤® जà¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾ डिवेलप नहीं हो पाता।
बचà¥à¤šà¥‹à¤‚ में à¤à¤²à¤°à¥à¤œà¥€ होने की आशंका बड़ों से कहीं जà¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾ होती है। बचà¥à¤šà¤¾ अगर बहà¥à¤¤ जà¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾ थकान का शिकार होता हो, उसे सरà¥à¤¦à¥€-जà¥à¤•ाम बना रहता हो, नाक में खà¥à¤œà¤²à¥€ होती हो तो इसे à¤à¤²à¤°à¥à¤œà¥€ हो सकती है।
सावधानी के लिठजिन चीजों से हम बचà¥à¤šà¥‹à¤‚ को परहेज करा रहे होते हैं, वही परहेज उनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ और बीमार कर रहा होता है। हम हाइजीन के नाम पर बचà¥à¤šà¥‹à¤‚ को धूल, मिटà¥à¤Ÿà¥€, बारिश आदि में खेलने से रोकते रहते हैं। इसे हाइजीन हाइपोथीसिस कहते हैं।
जिन बचà¥à¤šà¥‹à¤‚ का वैकà¥à¤¸à¤¿à¤¨à¥‡à¤¶à¤¨ नहीं किया जाता, उनमें à¤à¥€ à¤à¤²à¤°à¥à¤œà¥€ की समसà¥à¤¯à¤¾ कम देखी गई है। वैकà¥à¤¸à¤¿à¤¨à¥‡à¤¶à¤¨ से बचà¥à¤šà¥‹à¤‚ का शरीर बैकà¥à¤Ÿà¥€à¤°à¤¿à¤¯à¤¾ से तो बच जाता है लेकिन इमà¥à¤¯à¥‚न सिसà¥à¤Ÿà¤® कमजोर हो जाता है। जो चीज शरीर के इमà¥à¤¯à¥‚न सिसà¥à¤Ÿà¤® को अपने मà¥à¤¤à¤¾à¤¬à¤¿à¤• नहीं लगतीं, वह उनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ अपने तरीके से निकालने की कोशिश में लग जाता है। यह तरीका छींक, चकतà¥à¤¤à¥‡, बà¥à¤–ार आदि हो सकता है।
इसी तरह बà¥à¤œà¥à¤°à¥à¤—ों में à¤à¥€ à¤à¤²à¤°à¥à¤œà¥€ की समसà¥à¤¯à¤¾ काफी कॉमन है कà¥à¤¯à¥‹à¤‚कि उनका इमà¥à¤¯à¥‚न सिसà¥à¤Ÿà¤® à¤à¥€ कमजोर हो जाता है। बदलते मौसम आदि में उनका खास खà¥à¤¯à¤¾à¤² रखना चाहिà¤à¥¤
कई बार à¤à¤²à¤°à¥à¤œà¥€ खानदानी à¤à¥€ होती है। पैरंटà¥à¤¸ को अगर धूल या किसी और चीज से à¤à¤²à¤°à¥à¤œà¥€ हो तो बचà¥à¤šà¥‹à¤‚ को à¤à¤²à¤°à¥à¤œà¥€ होने के चांस बढ़ जाते हैं। हालांकि यह जरूरी नहीं है कि दोनों की à¤à¤²à¤°à¥à¤œà¥€ का सà¥à¤µà¤°à¥‚प à¤à¤• जैसा ही हो। मां को अगर धूल से à¤à¤²à¤°à¥à¤œà¥€ की वजह से सà¥à¤•िन रैशेज पड़ते हों तो बचà¥à¤šà¥‡ को खà¥à¤¶à¤¬à¥‚ से à¤à¤²à¤°à¥à¤œà¥€ होने की वजह से छींकें आ सकती हैं।
देश में करीब 20 से 30 फीसदी लोग à¤à¤²à¤°à¥à¤œà¥€ से पीड़ित हैं, जबकि अमेरिका, इंगà¥à¤²à¥ˆà¤‚ड, ऑसà¥à¤Ÿà¥à¤°à¥‡à¤²à¤¿à¤¯à¤¾ और नà¥à¤¯à¥‚जीलैंड जैसे देशों में à¤à¤²à¤°à¥à¤œà¥€ के मरीजों की संखà¥à¤¯à¤¾ 40 फीसदी से à¤à¥€ जà¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾ है।
कैसे है बचाव संà¤à¤µ
हमारे देश में लोगों को à¤à¤²à¤°à¥à¤œà¥€ के बारे में जानकारी कम है। अकà¥à¤¸à¤° लोगों को पता ही नहीं चलता कि वे बार-बार बीमार पड़ रहे हैं तो उसकी वजह खाना या मौसम à¤à¥€ हो सकता है। दरअसल, अगर किसी चीज को लेकर शरीर में रिà¤à¤•à¥à¤¶à¤¨ दिखे तो डॉकà¥à¤Ÿà¤° को दिखाना चाहिठऔर दोबारा इस चीज के इसà¥à¤¤à¥‡à¤®à¤¾à¤² से बचना चाहिà¤à¥¤
बचà¥à¤šà¥‹à¤‚ के इमà¥à¤¯à¥‚न सिसà¥à¤Ÿà¤® को मजबूत करने के लिठउनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ जरूरी चीजें à¤à¥€ दी जानी चाहिà¤à¥¤ बचà¥à¤šà¥‹à¤‚ को चारदीवारी में बंद करके नहीं रखा जाना चाहिà¤à¥¤
बचà¥à¤šà¥‹à¤‚ को धूल-मिटà¥à¤Ÿà¥€ और धूप में खेलने दें। ये बचà¥à¤šà¥‹à¤‚ को बीमारियों से लड़ने में मदद करते हैं। उनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ बारिश या दूसरे पानी से à¤à¥€ खेलने दें। हां, धूल-मिटà¥à¤Ÿà¥€ में खेलने के बाद उनके हाथ-पैर अचà¥à¤›à¥‡ से धà¥à¤²à¤µà¤¾à¤¨à¤¾ न à¤à¥‚लें।
अगर किसी को धूल और धà¥à¤à¤‚ से à¤à¤²à¤°à¥à¤œà¥€ है तो घर से बाहर निकलने से पहले नाक पर रà¥à¤®à¤¾à¤² रखना चाहिà¤à¥¤ बचाव ही à¤à¤²à¤°à¥à¤œà¥€ का इलाज है।
जिन लोगों को ठंड से à¤à¤²à¤°à¥à¤œà¥€ है, वे ठंडी और खटà¥à¤Ÿà¥€ चीजों जैसे कि अचार, इमली, आइसकà¥à¤°à¥€à¤® आदि के इसà¥à¤¤à¥‡à¤®à¤¾à¤² से बचें।
गंदगी से à¤à¤²à¤°à¥à¤œà¥€ वाले लोगों को समय-समय पर चादर, तकिठके कवर और परà¥à¤¦à¥‡ à¤à¥€ बदलते रहना चाहिà¤à¥¤ कारपेट यूज न करें या फिर उसे कम-से-कम 6 महीने में डà¥à¤°à¤¾à¤‡à¤•à¥à¤²à¥€à¤¨ करवाते रहें।
जिस दवा से à¤à¤²à¤°à¥à¤œà¥€ है, उसे खाने से बचें। डॉकà¥à¤Ÿà¤° को दिखाà¤à¤‚ तो इस à¤à¤²à¤°à¥à¤œà¥€ के बारे में जरूर बताà¤à¤‚।
घर में केरोसिन वाले सà¥à¤Ÿà¥‹à¤µ की जगह à¤à¤²à¤ªà¥€à¤œà¥€ या इलेकà¥à¤Ÿà¥à¤°à¤¿à¤• सà¥à¤Ÿà¥‹à¤µ यूज करें। किचन में à¤à¤—à¥à¤œà¥‰à¤¸à¥à¤Ÿ फैन जरूर लगवाà¤à¤‚ और खाना पकाते समय उसे चलाà¤à¤‚।
घर को हमेशा बंद न रखें। घर को खà¥à¤²à¤¾ और हवादार बनाठरखें ताकि साफ हवा आती रहे।
खिड़कियों में महीन जाली लगवाà¤à¤‚ और जाली वाली खिड़कियों को हमेशा बंद रखें कà¥à¤¯à¥‹à¤‚कि खà¥à¤²à¥€ खिड़की से कीड़े और मचà¥à¤›à¤° आपके घर में घà¥à¤¸ सकते हैं।
दीवारों पर फफूंद और जाले हो गठहों, तो उनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ साफ करते रहें कà¥à¤¯à¥‹à¤‚कि फफूंद के कारण à¤à¥€ à¤à¤²à¤°à¥à¤œà¥€ हो सकती है।
बारिश के मौसम में फूल वाले पà¥à¤²à¤¾à¤‚टà¥à¤¸ को घर के अंदर न रखें।
असà¥à¤¥à¤®à¤¾ और à¤à¤²à¤°à¥à¤œà¥€ में फरà¥à¤•
असà¥à¤¥à¤®à¤¾ और à¤à¤²à¤°à¥à¤œà¥€ में कई चीजें कॉमन हैं, लेकिन फिर à¤à¥€ दोनों अलग-अलग हैं। लगातार कई दिनों तक जà¥à¤•ाम, खांसी या सांस लेने में दिकà¥à¤•त हो तो इनà¥à¤«à¥‡à¤•à¥à¤¶à¤¨ इसकी वजह हो सकता है, जबकि असà¥à¤¥à¤®à¤¾ में सांस लेने में परेशानी के अलावा रात में सोते वकà¥à¤¤ खांसी आना, छाती में जकड़न महसूस होना, à¤à¤•à¥à¤¸à¤°à¤¸à¤¾à¤‡à¤œ करते हà¥à¤ या सीढ़ियां चढ़ते वकà¥à¤¤ सांस फूलना या खांसी आना, जà¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾ ठंड या गरà¥à¤®à¥€ होने पर सांस लेने में दिकà¥à¤•त होना जैसे लकà¥à¤·à¤£ होते हैं। हालांकि à¤à¤•à¥à¤¸à¤ªà¤°à¥à¤Ÿà¥à¤¸ का कहना है कि असà¥à¤¥à¤®à¤¾ à¤à¥€ à¤à¤• तरह की à¤à¤²à¤°à¥à¤œà¥€ ही है। जैसे ही शरीर à¤à¤²à¤°à¥à¤œà¥€ वाली चीजों के संपरà¥à¤• में आता है, असà¥à¤¥à¤®à¤¾ का अटैक होता है। इसे à¤à¤²à¤°à¥à¤œà¤¿à¤• असà¥à¤¥à¤®à¤¾ कहते हैं। हां, असà¥à¤¥à¤®à¤¾ और à¤à¤²à¤°à¥à¤œà¥€ में à¤à¤• और कनेकà¥à¤¶à¤¨ है। अगर किसी को à¤à¤²à¤°à¥à¤œà¤¿à¤• असà¥à¤¥à¤®à¤¾ नहीं है, सिरà¥à¤« à¤à¤²à¤°à¥à¤œà¥€ है तो असà¥à¤¥à¤®à¤¾ होने का खतरा 40 फीसदी तक बढ़ जाता है।
à¤à¤²à¤°à¥à¤œà¥€ के लिठटेसà¥à¤Ÿ
à¤à¤²à¤°à¥à¤œà¥€ के लिठ2 टेसà¥à¤Ÿ होते हैं:
1. सà¥à¤•िन पैच टेसà¥à¤Ÿ: जिस à¤à¥€ चीज से à¤à¤²à¤°à¥à¤œà¥€ का शक होता है, उसका कंसंटà¥à¤°à¥‡à¤¶à¤¨ सà¥à¤•िन पर पैच के जरिठलगाया जाता है। इसके रिजलà¥à¤Ÿ सटीक होते हैं।
2. बà¥à¤²à¤¡ टेसà¥à¤Ÿ: बà¥à¤²à¤¡ टेसà¥à¤Ÿ से à¤à¥€ à¤à¤²à¤°à¥à¤œà¥€ की जांच होती है। हालांकि à¤à¤•à¥à¤¸à¤ªà¤°à¥à¤Ÿ इसे बहà¥à¤¤ सटीक नहीं मानते।
सà¥à¤•िन पैच टेसà¥à¤Ÿ कराने का खरà¥à¤š 8 से 10 हजार रà¥à¤ªà¤¯à¥‡ आता है। टेसà¥à¤Ÿ के जरिठ60 तरह की à¤à¤²à¤°à¥à¤œà¥€ की जानकारी मिल जाती है।
à¤à¤²à¤°à¥à¤œà¥€ का इलाज
à¤à¤²à¥‹à¤ªà¤¥à¥€
फूड à¤à¤²à¤°à¥à¤œà¥€ खासकर गेहूं से होने वाली सिलियक (Celiac) डिजीज उतà¥à¤¤à¤° à¤à¤¾à¤°à¤¤ में जà¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾ देखी जाती है। अगर किसी यà¥à¤µà¤¾ में खून की कमी, विटमिन डी या कैलà¥à¤¶à¤¿à¤¯à¤® की कमी पाई जाती है तो हो सकता है कि उसे गेहूं से होने वाली गà¥à¤²à¥‚टन à¤à¤²à¤°à¥à¤œà¥€ हो। अगर सà¥à¤•िन टेसà¥à¤Ÿ पॉजिटिव आता है तो मरीज को गेहूं से बनी चीजें खाने से रोक दिया जाता है। गेहूं के बजाय मकà¥à¤•ा, सिंघाड़ा, चने आदि का आटा खाने को दिया जाता है। शरीर में जिन ततà¥à¤µà¥‹à¤‚ की कमी है, उनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ बढ़ाने के लिठदवाà¤à¤‚ à¤à¥€ दी जाती हैं।
वैसे हलà¥à¤•ी-फà¥à¤²à¥à¤•ी à¤à¤²à¤°à¥à¤œà¥€ यानी अगर छींकें आ रही हैं या खà¥à¤œà¤²à¥€ हो रही है तो à¤à¤µà¤¿à¤² (Avil) और सिटà¥à¤°à¤¿à¤œà¤¿à¤¨ (Cetirizine) ले सकते हैं। ये दोनों जेनरिक नेम हैं। à¤à¤•à¥à¤¸à¤ªà¤°à¥à¤Ÿà¥à¤¸ का कहना है कि ये दवाà¤à¤‚ कà¥à¤› घंटों या फौरी राहत के लिठतो ठीक हैं, लेकिन लंबे समय चलनेवाली à¤à¤²à¤°à¥à¤œà¥€ में बेअसर हैं। à¤à¤²à¤°à¥à¤œà¥€ होने पर डॉकà¥à¤Ÿà¤° को दिखाà¤à¤‚। दवा à¤à¤²à¤°à¥à¤œà¥€ के पà¥à¤°à¤•ार के अलावा मरीज की सà¥à¤¥à¤¿à¤¤à¤¿ और उमà¥à¤° के मà¥à¤¤à¤¾à¤¬à¤¿à¤• à¤à¥€ तय की जाती है।
इमà¥à¤¯à¥‚नो थेरपी और à¤à¤²à¤°à¥à¤œà¥€ शॉटà¥à¤¸ से à¤à¥€ à¤à¤²à¤°à¥à¤œà¥€ का इलाज किया जाता है। अगर मरीज की हालत जà¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾ खराब हो, तà¤à¥€ इमà¥à¤¯à¥‚नो थेरेपी का सहारा लिया जाता है। यह सेफ तरीका है लेकिन तà¤à¥€ कारगर है, जब किसी à¤à¤¸à¥€ चीज से ही à¤à¤²à¤°à¥à¤œà¥€ हो, जिसे नजरअंदाज न किया जा सके। मसलन अगर किसी को पà¥à¤°à¥‰à¤¨ खाने से à¤à¤²à¤°à¥à¤œà¥€ है तो वह उसे नहीं खाà¤à¤—ा, लेकिन अगर पॉलेन से à¤à¤²à¤°à¥à¤œà¥€ है तो वह हमेशा ही बीमार रहेगा। à¤à¤¸à¥‡ मरीजों को यह थेरपी दी जाती है। इस थेरपी का असर लंबे समय तक रहता है। कई बार इसका असर 3-4 साल तक रहता है। हालांकि हर मरीज पर असर अलग-अलग हो सकता है। यह इलाज थोड़ा महंगा होता है।
होमà¥à¤¯à¥‹à¤ªà¤¥à¥€
होमà¥à¤¯à¥‹à¤ªà¤¥à¥€ में दवा बीमारी के लकà¥à¤·à¤£à¥‹à¤‚ के आधार पर दी जाती है। होमà¥à¤¯à¥‹à¤ªà¤¥à¥€ में सà¤à¥€ तरह की à¤à¤²à¤°à¥à¤œà¥€ का इलाज मà¥à¤®à¤•िन है। हालांकि असर थोड़ा धीमा होता है लेकिन बीमारी पूरी तरह ठीक हो जाती है। खà¥à¤¦ इलाज करने के बजाय किसी कà¥à¤µà¥‰à¤²à¤¿à¤«à¤¾à¤‡à¤¡ होमà¥à¤¯à¥‹à¤ªà¥ˆà¤¥à¤¿à¤• डॉकà¥à¤Ÿà¤° की सलाह लेनी चाहिà¤à¥¤
खाने-पीने की चीजों से à¤à¤²à¤°à¥à¤œà¥€ हो रही है तो नैटà¥à¤°à¤® मà¥à¤° (Natrum Mur) की 4 बूंदे सà¥à¤¬à¤¹-शाम थोड़े पानी में मिलाकर पीने की सलाह दी जाती है, लेकिन बचà¥à¤šà¥‹à¤‚ के लिठडोज अलग होती है।
à¤à¤¸à¥à¤ªà¥à¤°à¤¿à¤¨ (Aspirin) दवा से à¤à¤²à¤°à¥à¤œà¥€ होने पर कारà¥à¤¬à¥‹ वेज (Carbo Veg) और à¤à¤‚टिबायॉटिक से à¤à¤²à¤°à¥à¤œà¥€ होने पर सलà¥à¤«à¤° 200 (Sulphur 200) दी जाती है। कà¥à¤› à¤à¤²à¤°à¥à¤œà¥€ में बà¥à¤°à¤¾à¤¯à¥‹à¤¨à¤¿à¤¯à¤¾ (Bryonia), नकà¥à¤¸ वॉम (Nux Vomica), आरà¥à¤¸à¥‡à¤¨à¤¿à¤• à¤à¤²à¥à¤¬à¤® (Arsenicum Album) आदि दवाà¤à¤‚ दी जाती हैं। दवा की डोज उमà¥à¤° के मà¥à¤¤à¤¾à¤¬à¤¿à¤• तय होती है।
आयà¥à¤°à¥à¤µà¥‡à¤¦
रोज सà¥à¤¬à¤¹ नीबू पानी पिà¤à¤‚।
खटà¥à¤Ÿà¥€ और ठंडी चीजों से परहेज करें।
कà¤à¥€-कà¤à¥€ कोई दवा खाने से à¤à¥€ à¤à¤²à¤°à¥à¤œà¥€ हो जाती है इसलिठहमेशा दवा डॉकà¥à¤Ÿà¤° से पूछकर ही लें।
अगर सà¥à¤•िन à¤à¤²à¤°à¥à¤œà¥€ है तो फिटकरी के पानी से पà¥à¤°à¤à¤¾à¤µà¤¿à¤¤ हिसà¥à¤¸à¥‡ को धोà¤à¤‚। नारियल तेल में कपूर या जैतून तेल मिलाकर लगाà¤à¤‚। चंदन का लेप à¤à¥€ राहत देता है। इससे खà¥à¤œà¤²à¥€ कम होती है और चकतà¥à¤¤à¥‡ à¤à¥€ कम होते हैं।
पंचकरà¥à¤® का हिसà¥à¤¸à¤¾ नासà¥à¤¯ शिरोधारा à¤à¥€ à¤à¤²à¤°à¥à¤œà¥€ में à¤à¥€ बहà¥à¤¤ मदद करता है। इसमें खास तरीके से तेल नाक में डाला जाता है, लेकिन यह पà¥à¤°à¤•à¥à¤°à¤¿à¤¯à¤¾ घर में नहीं करनी चाहिà¤à¥¤ à¤à¤•à¥à¤¸à¤ªà¤°à¥à¤Ÿ की देखरेख में इसे करें।
नेचà¥à¤°à¥‹à¤ªà¤¥à¥€ और योग
योग और नेचà¥à¤°à¥‹à¤ªà¤¥à¥€ à¤à¤²à¤°à¥à¤œà¥€ से लड़ने में काफी कारगर हैं। नेचरोपथी à¤à¤•à¥à¤¸à¤ªà¤°à¥à¤Ÿà¥à¤¸ का कहना है कि à¤à¤²à¤°à¥à¤œà¥€ से बचने के लिठपेट साफ रखना चाहिà¤à¥¤ बहà¥à¤¤ गरà¥à¤® या बहà¥à¤¤ ठंडा खाना नहीं खाना चाहिà¤à¥¤ हमेशा साफ पानी पीना चाहिà¤à¥¤ रोजाना करीब 15 मिनट अनà¥à¤²à¥‹à¤®-विलोम, कपालà¤à¤¾à¤¤à¤¿, à¤à¤¸à¥à¤¤à¥à¤°à¤¿à¤•ा पà¥à¤°à¤¾à¤£à¤¾à¤¯à¤¾à¤® करने से à¤à¤²à¤°à¥à¤œà¥€ में फायदा होता है कà¥à¤¯à¥‹à¤‚कि इनसे इमà¥à¤¯à¥‚न सिसà¥à¤Ÿà¤® मजबूत होता है।
अगर जलà¥à¤¦à¥€-जलà¥à¤¦à¥€ सरà¥à¤¦à¥€ और जà¥à¤•ाम की à¤à¤²à¤°à¥à¤œà¥€ हो तो सà¥à¤¬à¤¹ उठकर गà¥à¤¨à¤—à¥à¤¨à¥‡ पानी में नींबू का रस मिलाकर पिà¤à¤‚।
पलूशन से होने वाली à¤à¤²à¤°à¥à¤œà¥€ से बचने के लिठगà¥à¤¨à¤—à¥à¤¨à¥‡ पानी में तà¥à¤²à¤¸à¥€, नीबू, काली मिरà¥à¤š और शहद डालकर पिà¤à¤‚।
बदलते मौसम में होने वाली à¤à¤²à¤°à¥à¤œà¥€ से बचने के लिठखटà¥à¤Ÿà¥€ चीजें जैसे कि अचार और तली-à¤à¥à¤¨à¥€ चीजें खाने से परहेज करें।
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